current affairs Daily Current Environment

अटलांटिक महासागर का भारतीय मानसून पर प्रभाव

चर्चा का कारण

हाल ही में शोधकर्ताओं ने अटलांटिक महासागर के ताप पैटर्न का भारतीय मानसून पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया

अटलांटिक महासागर का भारतीय मानसून पर प्रभाव

  • शोधकर्ताओं ने अटलांटिक महासागर के ऊपर समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव, हवा के पैटर्न को देखा और इसकी तुलना पिछले 106 वर्षों के भारतीय मानसून पैटर्न से करने के बाद यह निष्कर्ष निकला कि भूमध्यसागरीय अटलांटिक महासागर में परिवर्तन का भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा के साथ विपरीत संबंध है।
  • यदि अटलांटिक में एक ठंडा है, तो यह भारत में अधिक वर्षा ला सकता है।
  • अटलांटिक महासागर के गर्म होने या ठंडा होने को अटलांटिक जोनल मोड या अटलांटिक नीनो के नाम से भी जाना जाता है यह वायुमंडल में केल्विन तरंगों को प्रभावित करता है।ये तरंगें क्षोभमंडल को प्रभावित करती है।
  • केल्विन तरंगों उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर की ओर बढ़ती हैं और वायुमंडलीय तापमान को या तो बढ़ाती हैं या घटाती हैं। इससे हिंद महासागर और उपमहाद्वीप के बीच तापमान प्रवणता प्रभावित होता है और अन्तः मानसून प्रभावित होता
  • 1975 तक, ENSO भारतीय मानसून को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक था70 के दशक के बाद से अटलांटिक महासागर का भारतीय मानसून पर बढ़ता प्रभाव देख सकते हैं।

क्या है अल नीनो

  • एल-नीनो स्पैनिश भाषा का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है- शिशु यानी छोटा बालक। एल-नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र की उस समुद्री घटना का नाम है जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित इक्वाडोर और पेरु देशों के तटीय समुद्री जल में कुछ सालों के अंतराल पर घटित होती है।
  • एल नीनो ( El Nino) प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र की उस समुद्री घटना का नाम है, जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित इक्वाडोर और पेरु देशों के तटीय समुद्री जल में कुछ सालों के अंतराल पर घटित होती है।
  • यह समुद्र में होने वाली उथल-पुथल है और इससे समुद्र के सतही जल का ताप सामान्य से अधिक हो जाता है।
  • इससे समुद्र के सतही जल का ताप सामान्य से अधिक हो जाता है। अक्सर इसकी शुरूआत दिसंबर में क्रिसमस के आस-पास होती है।

अल नीनो का प्रभाव

  • एल-नीनो अक्सर दस साल में दो बार आती है और कभी-कभी तीन बार भी। एल-नीनो हवाओं के दिशा बदलने, कमजोर पड़ने तथा समुद्र के सतही जल के ताप में बढ़ोतरी की विशेष भूमिका निभाती है।
  • एल-नीनो का एक प्रभाव यह होता है कि वर्षा के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं। परिणामस्वरूप विश्व के ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा होने लगती है। कभी-कभी इसके विपरीत भी होता है।विश्व के मौसम को अस्त-व्यस्त कर देता है।
  • यह बार-बार घटित होने वाली मौसमी घटना है जो प्रमुख रूप से दक्षिण अमेरिका के प्रशान्त तट को प्रभावित करता है परंतु इस का समूचे विश्व के मौसम पर नाटकीय प्रभाव पड़ता है। पेरू के तट के पास जल ठंडा होता है एवं पोषक-तत्वों से समृद्ध होता है जो कि प्राथमिक उत्पादकों, विविध समुद्री पारिस्थिक तंत्रों एवं प्रमुख मछलियों को जीवन प्रदान करता है।
  • एल नीनो के दौरान, व्यापारिक पवनें मध्य एवं पश्चिमी प्रशांत महासागर में शांत होती है। इससे गर्म जल को सतह पर जमा होने में मदद मिलती है जिसके कारण ठंडे जल के जमाव के कारण पैदा हुए पोषक तत्वों को नीचे खिसकना पड़ता है और प्लवक जीवों एवं अन्य जलीय जीवों जैसे मछलियों का नाश होता है तथा अनेक समुद्री पक्षियों को भोजन की कमी होती है।

source the hindu

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *