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ईरान पर अमेरिकी प्रतिबन्ध और भारत

चर्चा का कारण
अमेरिका ने ईरान से तेल आयात पर प्रतिबन्ध लगाया था जो 2 मई को प्रभावी हुआ ।अमेरिका द्वारा भारत सहित 8 देशों को 2 मई तक ईरान के साथ तेल आयात की छूट दी गयी थी।

अमेरिका द्वारा ईरान प्रतिबन्ध मायने

  • अमेरिका ने ईरान को परमाणु समझौता के उल्लंघन के मामले को लेकर उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए उसके तेल निर्यात पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है।
  • इससे भारत सहित 8 देशों पर यह प्रतिबन्ध लागू होगा।
  • ये देश हैं -चीन,भारत,इटली,जापान,दक्षिण कोरिया ,ताईवान,तुर्की और ग्रीक ।इन देशों के ईरान के साथ तेल आयात पर कटौती करना होगा।

अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबन्ध लगाए जाने के कारण

  • अमेरिका ने ईरान पर कटरता को बढ़ावा देके का आरोप लगाया है ।
  • अमेरिका का मानना है की ईरान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है ।
  • अमेरिका में शेल गैस का उत्पादन बहुत बढ़ गया है जिसके कारण उसकी निर्भरता मध्यपूर्व के तेल निर्यातक देशों पर कम हुई है ।
  • साथ ही अब अमेरिका को शेल गैस को बेचने के लिए बाजार की जरुरत है ।
  • अमेरिका का कहना है की ईरान परमाणु ऊर्जा संधि का दुरूपयोग कर रहा है ।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने चुनावी घोषणा में भी इस बात का वादा किया था ।
  • अमेरिका का कहना है की यह फैसला ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने और ईरान को दुबारा बातचीत के लिए दबाव बनाएगा ।
  • इस फैसले का उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक लाना भी है ।अमेरिका का कहना है की ईरान 2015 के परमाणु समझौते का उलंघन कर रहा है।

तेल के क्षेत्र में भारत -ईरान तेल व्यापार

  • भारत अपनी जरुरत का 80प्रतिशत तेल आयत करता है ।
  • इसका बड़ा हिस्सा ईरान से तेल निर्यात के द्वारा पूरा किया जाता है ।
  • भारत ईरान से चीन के बाद दूसरा बड़ा तेल आयात करने वाला देश है ।
  • 2017 से भारत अब तक अपनी जरुरत का 10 प्रतिशत तेल ईरान से खरीदता है ।2017 -2018 के बीच ईरान से 220. 4 मिलियन बैरल तेल का आयात किया गया ।
  • 2018 -2019 तक प्रति माह 1. 25 मिलियन बैरल तेल की खरीद की गयी ।
  • ईरान ने भारत को भुगतान के लिए 60 दिन का समय ,मुफ्त बीमा और शिपिंग सुविधा प्रदान किया है।

भारत -ईरान व्यापार

  • भारत तथा ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब सालाना दो हजार डॉलर का है ।
  • भारत से ईरान दवा ,भरी मशीनरी ,कल पुर्जे और अनाज का निर्यात किया जाता है।
  • ईरान के तेल रिफाइनरी ,दवा ,फर्टिलाज़र खनन और निर्माण में भारत का निवेश अधिक हुआ है।

अमेरिका ईरान संबंधों का प्रभाव
1. भारत पर प्रभाव
2. विश्व पर प्रभाव
3. ईरान पर प्रभाव

1.भारत पर प्रभाव

  • भारत को अपनी ऊर्जा जरुरत को पूरी करने में समस्या आएगी क्योंकि ईरान से कुल आयत का 10 तेल प्राप्त होता था वो भी अनुकूल शर्तों पर ।
  • भारत का विकास दर में तेजी बनाये रखने के लिए यातायात ,परिवहन आदि में ऊर्जा आवश्यकता है।
  • भारत को विश्वसनीय तेल आपूर्ति करता देश को खोना पड़ेगा ।
  • तेल के आयत में अधिक व्यय करने से भुगतान संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा ।
  • साथ ही तेल के दाम बढ़ने पर महंगाई बढ़ने की सम्भावना है।
  • ईरान भारत को इराक तथा सऊदी अरब के बाद तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश है ।
  • ईरान से तेल आयात कम होने से भारत की सऊदी अरब तथा UAE पर निर्भरता बढ़ेगी।
  • भारत तथा ईरान के बीच अन्य व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होगी ।
  • अफगानिस्तान,मध्य एशिया तथा मध्यपूर्व के देशों में भारत के सामरिक और व्यापारिक हित प्रभावित होगा ।
  • ईरान क भारत का पुराना सामरिक और व्यापारिक सहयोगी है ।
  • अश्गाबाद समझौता में ईरान महत्वपूर्ण स्थान रखता है ।
  • साथ ही चीन की वन बेल्ट वन रोड में यह महत्वपूर्ण साबित होगा।

2.विश्व पर प्रभाव

  • विश्व में तेल आपूर्ति संकट उत्पन्न होगा।
  • अमेरिका तथा यूरोपीय देशों और मध्यपूर्व के देशों में शांति की कमी आएगी ।
    चीन तथा अमेरिका संबंधों तथा भारत अमेरिका संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • ओपेक देशों की भूमिका पुनः बढ़ जाएगी और अमेरिका शेल गैस की आपूर्ति मनमानी शर्तों पर कर सकता है।

3.ईरान पर प्रभाव

  • ईरान को नए बाजार की खोज करनी होगी जहाँ तेल की आपूर्ति बहुत जरुरी हो ।
  • साथ ही उसे व्यापारिक लाभ को भी ध्यान में रखना होगा ।
  • ईरान भारत सहित 8 देशों के साथ व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

भारत के पास विकल्प

  • इडियन आयल कॉर्पोरेशन का मेक्सिको से.0. 7 मिलियन टन कच्चा तेल खरीदने का करार किया है ।
  • सऊदी अरब से 5. 6 मिलियन टन तेल खरीदने का करार किया है ।
  • कुवैत से 1.5 मिलियन टन तथा UAE से 1 मिलियन टन का आयात करेगा।

भारत को आगे क्या करना चाहिए तथा भारत के हालिया प्रयास

  • चबहार बंदरगाह को और सुगम बनाना होगा इस पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है ।
  • छूट की सीमा बढ़ाने की बात करनी होगी ।भारत को अपने तेल स्रोतों की खोज करनी होगी।
  • भारत ने अपनी मेथेनाल इकॉनमी को बढ़ावा दे रहा है ।
  • जैव ईंधन नीति 2017 को इसी आलोक में देखा जा सकता है ।
  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना होगा ।
  • भारत 2022 तक 175 मेगावाट ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से पूर्ति करेगा।

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