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चना का जीन सिक्वेंसिंग

चर्चा का कारण

पहली बार वैज्ञानिकों ने जीनोम सिक्वेसिंग के जरिए काबुली चने के उस जीन की पहचान कर ली है जो न सिर्फ ज्यादा पैदावार देने में सक्षम है बल्कि कीटनाशक और रोगमुक्त होने के साथ जलवायु परिवर्तन की समस्याओं जैसे सूखा और ताप से भी लड़ सकता है।

इससे सम्बंधित विशिष्ट तथ्य

  • कुल वैश्विक पैदावार का 90 फीसदी हिस्सा दक्षिण एशिया में ही पैदा किया जाता है। हालांकि, सूखा और बढ़ते तापमान के कारण वैश्विक स्तर पर 70 फीसदी फसल नष्ट हो जाती है।
  • काबुली चने की जीन सिक्वेंसिंग के शोध में आईसीआरआईएसएटी के अलावा टीम में हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय फसल शोध संस्थान व चीन की संस्था बीजीआई शेनझेन की भागीदारी थी।
  • यह सूखा, ताप से लड़ने के लिए पहली बार सफल तरीके से जीनोम सिक्वेसिंग की गई है।
  • ज्यादा पैदावार के साथ पोषण देने वाली फसलों में सुधार और उन्हें अपनाए जाने से दक्षिण एशिया व उप सहारा अफ्रीका क्षेत्र में कुपोषण की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। इन दोनों क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन की सबसे ज्यादा मार पड़ रही है।
  • चना प्रोटीन के अलावा बीटा कैरोटीन और फास्फोरस, कैल्सियम, मैग्नीशियम, जिंक समेत अन्य खनिज भी इससे मिलते हैं।
  • भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दालों का उपभोग करता है। लेकिन देस में इसका उत्पादन बेहद कम है।
  • इस तरह का शोध भारत को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बना सकता है। वैश्विक चना उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 65 फीसदी है।

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