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नीति निदेशक तत्व -1



संविधान में नीति निदेशक तत्व क्या है? 

  • नीति निदेशक तत्व एक तरह से राज्यों के कर्तव्यों की सूचि होती है जो राज्य के कार्यों को करने हेतु दिशा निर्देश प्रदान करते हैं।
  • नीति निदेशक तत्व राज्य के कर्तव्य के साथ -साथ अधिकार के भी सूचक है, जैसे राज्य को इस क्षेत्र में कार्य करना है ।
  • परन्तु इसका क्रियान्वयन राज्यों की इच्छा और सुविधानुसार किया जा सकता है अर्थात राज्यों को नींति निदेशक के प्रावधानों के अनुसार कार्य करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता है।

भारतीय संविधान में नीति निदेशक तत्व का विकास।

  • भारतीय सविधान में निति निदेशक तत्व का प्रावधान आयरलैंड के संविधान से लिया गया है ।
  • आयरलैंड के संविधान में नीति निर्देशक तत्व का प्रावधान 1937 में किया गया था।
  • भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान नेहरू रिपोर्ट में दो तरह के प्रावधान किये गए थे-
    1. कुछ प्रावधान ऐसे थे जिसके पालन करवाने के लिए नागरिक सरकार को बाध्य कर सकती थी ये मौलिक अधिकार की श्रेणी में आते थे।
    2. कुछ प्रावधान ऐसे थे जिसके पालन करवाने के लिए नागरिक सरकार को बाध्य नहीं कर सकती थी ये नीति निदेशक की श्रेणी में आते थे।
  • भारतीय संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 तक नीति निदेशक तत्वों का प्रावधान किया गया है।

   नीति निदेशक तत्वों का वर्गीकरण

       समाजवादी सिद्धांत के अंतर्गत

  • अनुच्छेद 38 –लोक कल्याण की वृद्धि हेतु सामाजिक ,आर्थिक और राजनितिक न्याय ,आय ,प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता।
  • अनुच्छेद 39  –सभी नागरिकों की जीविका का साधन उपलब्ध कराना ,धन तथा उत्पादन के सेंकेंद्रण को रोकना ,बालकों के स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध करवाना।
  •  अनुच्छेद 39   –समान न्याय और गरीबों को निः शुल्क विधिक सहायता  उपलब्ध करवाना।
  • अनुच्छेद 41  –काम ,तथा शिक्षा पाने का अधिकार तथा निः शक्तता के क्षेत्र में कार्य।
  •  अनुच्छेद 42  –काम की न्यायसंगत तथा मानवोचित दशा तथा प्रसूति से सम्बंधित प्रावधान।
  • अनुच्छेद 43 –निर्वाह मजदूरी से सम्बंधित प्रावधान
  •  अनुच्छेद 43   –उद्योगों में कर्मकारों को प्रबंधन में भागीदारी से सम्बंधित प्रावधान
  • अनुच्छेद 47 —पोषाहार तथा जीवन सत्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वास्थ्य से सम्बंधित प्रावधान

 गाँधीवादी सिद्धांत के अंतर्गत

  • अनुच्छेद 40 —ग्राम पंचायतों का गठन और शक्ति हस्तांतरण।
  •   अनुच्छेद 43 —ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना।
  •   अनुच्छेद 43-b —सहकारिता को प्रोत्साहन देना।
  •  अनुच्छेद 46 —अनुसूचित जाति /जनजाति वर्गों को शोषण से सुरक्षा।
  •   अनुच्छेद 47 —नशीली दवाओं तथा शराब पर प्रतिबन्ध।
  •   अनुच्छेद 48 —गाय ,बछड़ा तथा पशु बलि पर रोक तथा उनकी नस्ल में सुधार।

उदार बौद्धिक सिद्धांत

  •  अनुच्छेद 44  —समान नागरिक सहिता का प्रावधान
  • अनुच्छेद 45  —6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निः शुल्क शिक्षा का प्रावधान
  • अनुच्छेद 48  —कृषि तथा पशुपालन को आधुनक बनाने का प्रावधान
  • अनुच्छेद 48   —पर्यावरण तथा वन्य जीवों का संरक्षण से सम्बंधित प्रावधान
  • अनुच्छेद 50  —लोक सेवा तथा न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने का प्रावधान
  • अनुच्छेद 51 —अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से सम्बंधित प्रावधान

नीति निदेशक तत्व की विशेषताएं

  • नीति निदेशक तत्व गैर न्यायोचित प्रकृति की है अर्थात इसका न्यायायलय द्वारा पालन करवाया नहीं जा सकता है ।
  • यह कल्याणकारी प्रकृति का है यह राज्य को पुलिस राज्य से कल्याणकारी राज्य बनता है।
  • निदेशक तत्व भारत शासन अधिनियम, 1935 में उल्लेखित अनुदेशों के सामान है ।
  • नीति निदेशक तत्व का पालन कार्यपालिका तथा विधायिका से ही अपेक्षित है न कि न्यायपालिका से ।
  • यह शक्ति पृथककरण का आधार भी है और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का प्रेरक भी ।

नीति निदेशक तत्व और मौलिक अधिकारों में अंतर

नीति निदेशक तत्व और मलिक अधिकार के बीच अंतर स्वरुप ,विस्तार ,क़ानूनी मान्यता ,न्यायायिक दृष्टिकोण, व्यक्ति -मानव -राज्य-सम्बन्ध के आधार पर भी निर्धारत किया जा सकता है।नीति निदेशक तत्व और मौलिक अधिकार के बीच निम्न अंतर है

  • नीति निदेशक तत्व स्वतः लागू नहीं होते है इन्हें कानून बनाकर लागू किया जाता है जबकि मौलिक अधिकार को लागू करने के लिए कानून बनाने की आवश्यकता नहीं होती है। हमेशा लागू रहते हैं ।
  • नीति निदेशक तत्व सामूहिक या अधिकतम कल्याण से जुड़े होते है जबकि मौलिक अधिकारों का सम्बन्ध व्यक्तिगत होता है।
  • नीति निदेशक तत्व को नैतिक और राजनितिक आधार प्राप्त होता है जबकि मौलिक अधिकार को क़ानूनी आधार प्राप्त होता है ।
  • नीति निदेशक तत्व सामाजिक और आर्थिक कल्याण पर बल देता है जबकि मौलिकाधिकार राजनितिक अधिकार पर बल देता है ।
  • नीति निदेशक तत्व तत्व गैर न्यायोचित होता है जबकि मौलिक अधिकार को न्यायायिक प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है ।
  • नीति निदेशक तत्व को सकारात्मक माना जाता है जबकि मौलिक अधिकारों की प्रकृति नकारात्मक माना जाता है।

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