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बिम्सटेक-2

बिम्सटेक का महत्त्व

  • बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टीसेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनामिक कोऑपरेशन दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का एक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग संगठन के रूप में उपयोगी होगा |
  •  सम्बंधित क्षेत्र में आर्थिक और सांस्कृतिक विकास तथा सहयोग में सहायक होगा |

 

  • हिंदमसागर को शांति क्षेत्र बनाये रखने में सहायक होगा |
  •  समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया में होने वाले व्यापार का एक-चौथाई हिस्सा बंगाल की खाड़ी से होकर गुज़रता है|
  • सात देशों का यह संगठन मूल रूप से एक सहयोगात्मक संगठन है जो व्यापार, ऊर्जा, पर्यटन, बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी के किनारे दक्षिण एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच सभी प्रकार के सम्बन्धो में विकास में सहायक होगा|

 सार्क तथा बिम्सटेक

  • बिम्सटेक दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया के बीच एक पुल की तरह काम करता है|
  • इसके सात में से पाँच देश सार्क के सदस्य हैं जबकि दो आसियान के सदस्य हैं|
  • ऐसे में यह सार्क और आसियान देशों के बीच अंतर क्षेत्रीय सहयोग का भी एक मंच है|
  • पाकिस्तान द्वारा सार्क में भारत विरोध की स्थिति में बिम्सटेक का महत्त्व बढ़ जाता है |

 

  • भारत की बिम्सटेक में सक्रिय भागीदारी से भारत की एक्ट ईस्ट पालिसी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा|
  • इतना ही नहीं सीमापार आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला करने के लिये भारत को क्षेत्रीय संगठन की आवश्यकता है जिसमें सदस्य देश आतंकवाद के मुद्दे पर वैचारिक रूप से एकमत हों|
  • बिम्सटेक अपने एजेंडा का मज़बूती से विस्तार कर रहा है| इस समूह ने प्राथमिकता के 14 क्षेत्रों की पहचान की है जिनमें से 4 फोकस क्षेत्रों में भारत लीड कंट्री है जिसमें परिवहन और संचार, पर्यटन, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन के साथ आतंकवाद के खिलाफ रणनीति शामिल है|

बिम्सटेक की बैठक

  •  बिम्सटेक की अब तक चार शिखर बैठकें और अनेक मंत्री और अधिकारी स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं|

1 पहला शिखर सम्मेलन       2004      बैंकाक

2 दूसरा शिखर सम्मेलन       2008      नई दिल्ली

तीसरा शिखर सम्मेलन      2014      म्याँमार

4 चौथा शिखर सम्मेलन       2018      काठमांडू

 

काठमांडू घोषणापत्र

  • इसमें बिम्सटेक देशों  ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सतत् विकास के लिये सार्थक सहयोग और एकजुटता की प्रतिबद्धता दोहराई है|
  • काठमांडू घोषणापत्र में  बिम्सटेक के सदस्य देशों के बीच बिजली ग्रिड को जोड़ने के लिये समझौता भी हुआ|
  •  काठमांडू घोषणापत्र में बिम्सटेक देशों ने  व्यापार, कनेक्टिविटी, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है|
  • काठमांडू घोषणापत्र में आतंकवाद, मादक द्रव्यों की तस्करी जैसी समस्याओं से एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया|
  • काठमांडू घोषणापत्र में नालंदा विश्वविद्यालय में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के अध्ययन के लिये एक सेंटर बनाने की घोषणा की| अगस्त 2020 में भारत अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन करेगा|

बिम्सटेक को प्रभावी बनाने हेतु सुझाव

  • बिम्सटेक के सभी सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी एवं परस्पर समन्वय के माध्यम से इस क्षेत्रीय संगठन को आर्थिक विकास का केंद्र बनाने के लिये भारत को अपने कदम आगे बढ़ाने होंगे।
  • इसके अलवा संगठन के बेहतर कार्यान्वयन के लिये कम प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा।
  • भारत को अनौपचारिक रूप से बिम्सटेक के नेतृत्वकर्त्ता की भूमिका निभानी होगी और इसके व्यावहारिक प्रतिबद्धताओं के लिये एक मिशाल साबित करना होगा।
  • इसके सदस्य देशों की तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता लेकर बहुपक्षीय एजेंडा निर्धारित करने और शिखर सम्मेलन तथा मंत्रिस्तरीय बैठकों के बीच चालक दल के रूप में कार्य करने के लिये सचिवालय को स्वायत्तता प्रदान करना होगा।
  • साथ ही सदस्य देशों द्वारा इस संगठन के लिये वित्तीय और मानव संसाधन की सुनिश्चितता को बनाए रखना भी आवश्यक है।
  • सदस्य देशों द्वारा समय पर सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना ही अक्सर बहुपक्षीय संगठन की आधी सफलता का निर्धारण करता है।

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