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भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग

चर्चा का कारण

 भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 20 मई, 2019 को अपना 10वां वार्षिक दिवस मनाया जो प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के व्यापक प्रवर्तन प्रावधानों की अधिसूचना जारी होने को दर्शाता है।

 भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन

  • अर्थव्यवस्था में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सृजन और इस संदर्भ मेंसबको समान अवसर प्रदान करनेके लिए भारतीय संसद द्वारा 13 जनवरी 2003 को प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 को लागू किया गया।
  • इसके उपरान्त 14 अक्टूबर 2003 से केन्द्र सरकार द्वारा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की स्थापना की गई।इसके बाद प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2007 द्वारा इस अधिनियम में संशोधन किया गया।
  •  मई 2009, को प्रतिस्पर्धाविरोधी समझौते और प्रमुख स्थितियों के दुरुपयोग से संबंधित अधिनियम के प्रावधानों को अधिसूचित किया गया।
  • यह अधिनियम जम्मूकश्मीर के अलावा संपूर्ण भारत में लागू होता है।
  • एक अध्यक्ष और 6 सदस्यों के साथ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग पूरी तरह से कार्यात्मक है।

उद्देश्य

  • प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली पद्धतियों को रोकना
  • बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और इसे बनाए रखना
  • उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना
  • भारतीय बाजार में अथवा इसके अलावा आनुषांगिक जुडे मामलों के लिए अन्य प्रतिभागियों द्वारा किए जाने वाले व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना

प्रतिस्पर्धा आयोग के कार्य

  • भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग को जांच प्रक्रिया द्वारा प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते और एकाधिकार के दुरुपयोग को रोकने तथा संयोजनों (विलयन अथवा गठजोड अथवा अधिग्रहण) के नियामन का कार्य दिया गया है
  • यह सरकार को प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में सलाहकारी भूमिका भी अदा करता है
  • सीसीआई को प्रतिस्पर्धा मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा को बढ़वा देना , जन जागरुकता और प्रशिक्षण  देने का भी कार्य सौपा गया है।
  • केन्द्र सरकार अथवा कोई राज्य सरकार अथवा किसी भी कानून के तहत गठित प्राधिकरण को जाँच के लिए आदेश दे सकता है।
  • आयोग के द्वारा स्वंय अपनी जानकारी अथवा ज्ञान के आधार पर जांच शुरु कर सकता है।
  •  जांच के दौरान आयोग एक पार्टी को प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते अथवा प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग से रोककर अंतरिम राहत प्रदान कर सकता है।
  •  जांच के बाद आयोग दोषी उद्यम को प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते अथवा प्रमुख स्थिति के दुरुपयोग से दूर रहने और इसमें दोबारा प्रवेश करने का निर्देश दे सकता है।

 

 

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