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विशेष राज्य का दर्जा

विशेष राज्य का दर्जा और संविधान

  • भारतीय संविधान में विशेष राज्य का प्रावधान स्पष्ट रूप से नहीं किया गया है ।
  • भारतीय संविधान के भाग 21 में अनुच्छेद 371 से 371 झ तक बारह राज्यों के सम्बन्ध में विशेष प्रावधान किया गया है ।
  • इन राज्यों का नाम है –महाराष्ट्र,गुजरात, नागालैंड,असम ,मणिपुर ,आंध्र प्रदेश,तेलंगाना,सिक्किम,मिजोरम,अरुणाचल प्रदेश कर्नाटक,एवं गोवा।
  • कुछ विशेष राज्यों को केंद्रीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है ।

विशेष राज्य की दर्जा की अवधारणा का विकास

  • विशेष राज्य का दर्जा देने सम्बन्धी चर्चा 5 वीं वित्त आयोग के दौरान की गयी थी ।
  • विशेष राज्य के दर्जे हेतु शर्तों के निर्धारण के लिए गाडगिल आयोग की नियुक्ति की गयी। गाडगिल आयोग की सिफारिश को गाडगिल फार्मूला कहा जाता है ।

गाडगिल फार्मूला

  • विशेष श्रेणी के राज्यों की आवश्यकतों को पूरा करने के बाद जो संसाधन बच जाते हैं ,उन्हें 60 प्रतिशत जनसंख्या के आधार पर ,25 प्रतिशत राज्य की प्रति व्यक्ति आय के आधार ,7. 5 प्रतिशत राजकोषीय उपलब्धि के आधार पर तथा 7. 5 राज्यों की विशेष परिस्थिति के आधार पर वितरित किया जायेगा।

विशेष राज्य की दर्जा हेतु निर्धारित शर्तें

  • राज्य का भूभाग पर्वतीय तथा दुर्गम हो ।
  • राज्य अन्तराष्ट्रीय सीमा बनाता हो ।
  • प्रति व्यक्ति आय बहुत कम हो तथा गैर राजस्व कर की मात्रा कम हो ।
  • आधारभूत संरचना का आभाव या कमी हो।
  • जनजातीय आबादी हो तथा जन घनत्व कम हो ।
  • राज्य के पिछड़ापन ,भौगोलिक स्थिति ,सामाजिक कारकों को भी मानक बनाया जा सकता है।

विशेष राज्य का दर्जा मिलने से संभावित लाभ

  • सम्बंधित राज्य की केंद्रीय सहायता में वृद्धि होती है ।
  • केंद्रीय सहायता के रूप में दी गयी राशि में 10 प्रतिशत ऋण होता है तथा 90 प्रतिशत अनुदान होता है।
  • केंद्र सरकार से कई तरह के पैकेज दिए जाते हैं तथा टैक्स छूट भी प्रदान की जाती है ।
  • विशेष श्रेणी के राज्यों को एक्साइज ,कस्टम ,कॉरपोरेट इनकम टैक्स में भी रियायत दिया जा सकता है ।
  • विशेष राज्य के दर्जा प्राप्त राज्य को स्वैपिंग स्कीम का लाभ मिलता है तथा ऋण राहत परियोजनाओं का लाभ मिलता है ।विशेष प्राप्त राज्यों का बचा हुआ धन अगले वर्ष हस्तांतरित कर दिया जाता है ।

विशेष राज्य बनाम अन्य राज्य

  • सामान्य राज्यों को केंद्र के द्वारा प्रदत वित्तीय सहायता में 70 प्रतिशत कर्ज तथा 30 प्रतिशत अनुदान के रूप में होता है ।
  • विशेष राज्यों को 10 होता है जबकि 90 वित्तीय सहायता अनुदान के रूप में होती है ।
    विशेष कर्ज की केंद्रीय सहायता में अन्य राज्यों की अपेक्षा 60 प्रतिशत अधिक वित्तीय राशि प्राप्त होती है।

विशेष राज्य का दर्जा

  • 1969 से 1974 के पांच वर्षीय योजना के दौरान असम,जम्मू कश्मीर तथा नागालैंड को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था ।
  • 1974 से 1979 के पांच वर्षीय योजना के दौरान हिमाचल प्रदेश,मणिपुर,मेघालय,सिक्किम,तथा त्रिपुरा को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया ।
  • 1998 में अरुणाचल प्रदेश तथा मिजोरम को यह दर्जा दिया गया ।
  • 2001 में उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया।

source rajya  sabha

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