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शंघाई सहयोग संगठन

शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन का विकास

  • शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) एक स्थायी अंतर सरकारी संगठन है, जिसके निर्माण की घोषणा 15 जून 2001 को शंघाई (चीन) में कजाकिस्तान गणराज्य, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, किर्गिज गणराज्य, रूसी संघ द्वारा की गई थी।
  • बाद में ताजिकिस्तान गणराज्य और उजबेकिस्तान गणराज्य को इसमें शामिल कर लिया गया तथा इसे संघाई 5 कहा जाने लगाl
  • शंघाई सहयोग संगठन यूरेशिया का राजनीतिक आर्थिक, और सैनिक संगठन हैl
  • 2001 मेॱ वापस शिऺघाई मे आयोजित शिखर सम्मेलन मेऺ उज्बेकिस्तान को शामिल कर “शंघाई VI” मेऺ बदल दिया गया जो अब शंघाई सहयोग संगठन ( Shanghai Cooperation Organisation) या SCO नाम से जाना जाता है। इसका मुख्यालय बीजिऺग मेऺ है।
  • 24 जून 2016 को भारत और पाकिस्तान को भी औपचारिक तौर पर अस्ताना म॓ॱ आयोजित शिखर सम्मेलन मेॱ संगठन का सदस्य बनाया गयाl
  • वर्तमान में इस संगठन में कुल 8 सदस्य देश हैं —-भारत , कजाकिस्तान , पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना, किर्गिस्तान पाकिस्तान, रूस , ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तानl
  • शंघाई सहयोग संगठन चार्टर पर हस्ताक्षर जून 2002 में सेंटपेटर्सबर्ग बैठक में की गयी थी तथा यह चार्टर 19 सितंबर 2003 को लागू हुआ।
  • यह चार्टर शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन का वैधानिक दस्तावेज है जिसमे संगठन के लक्ष्यों और सिद्धांतों, साथ ही साथ इसकी संरचना और मुख्य गतिविधियों का उल्लेख है।

शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन का प्रमुख उद्देश्य

  • सदस्य राज्यों के बीच आपसी विश्वास को बढ़ावा देना राजनीति, व्यापार, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के साथ-साथ शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और अन्य क्षेत्रों में उनके प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना
    सम्बंधित क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने और सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास करनााl
  • लोकतांत्रिक, निष्पक्ष और तर्कसंगत नए अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देनाl

सहयोग के आधारभूत सिद्धांत

  • शंघाई सहयोग संगठन सदस्य देशों के आपसी विश्वास, आपसी लाभ, समानता, आपसी परामर्श, सांस्कृतिक विविधता के लिए सम्मान और सामान्य विकास की इच्छा के सिद्धांतों के आधार पर अपनी आंतरिक नीति का अनुसरण करता हैl
  • इसकी निर्णय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है ।

शंघाई सहयोग संगठन का ढाँचा तथा कार्य प्रणाली

  • SCO शासकीय परिषद (HGC) की बैठक वर्ष में एक बार होती है।इसमें बहुपक्षीय सहयोग रणनीति और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर चर्चा की जाती है।
  • इस संगठन हेतु बजट पर चर्चा की जाती है ।सहयोग के क्षेत्रों में हुई प्रगति की चर्चा की जाती है तथा नए सहयोग हेतु क्षेत्रों की पहचान की जाती है।
  • शंघाई सहयोग संगठन आधिकारिक भाषा चीनी और रुसी है ।
  • शंघाई सहयोग संगठन के दो स्थायी निकाय हैं – बीजिंग स्थित एससीओ सचिवालयl
  • ताशकंद में स्थित क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी संरचना (आरएटीएस) की कार्यकारी समिति।
  • SCO के महासचिव और SCO RATS की कार्यकारी समिति के निदेशक को तीन साल की अवधि के लिए राज्य के प्रमुखों की परिषद द्वारा नियुक्त किया जाता है। राशिद अलीमोव (ताजिकिस्तान) और येवगेनी स्योसयेव (रूस) ने इन पदों पर नियुक्त किया गया है।

शंघाई सहयोग संगठनके पर्यवेक्षक देश हैं —अफगानिस्तान , बेलारूस गणराज्य, ईरान और मंगोलियाl

एससीओ डायलॉग पार्टनर देश हैं —अज़रबैजान , आर्मेनिया , कंबोडिया , नेपाल , तुर्की और श्रीलंका ।

संघाई सहयोग संगठन का महत्त्व

  • मध्य एशिया तथा यूरोप में शांति तथा प्रगति की स्थापना मेंl
  • एशिया तथा यूरोप में बेहतर सम्बन्ध स्थापित करने मेंl
  • बड़े बाजार के विकास मेंl
  • अंतर्राष्ट्रीय परिवहन के विकास मेंl

भारत और संघाई सहयोग संगठन

  • इससे भारत को व्यापक बाजार सुलभ होगा
    मध्य एशिया के देशों से भारत का सम्बन्ध और बेहतर होगाl
  • असगाबाद समझौता का महत्त्व बाद जायेगा
    भारत ओबोर में बिना शामिल हुए इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करने में सफल होगाl
  • पाकिस्तान तथा चीन से वार्ता हेतु यह एक मंच का कार्य करेगाl
  • एक साथ रूस तथा चीन से सम्बन्ध विकसित करने में मदद मिलेगीl
  • संगठन आतंकवाद-विरोधी है, इसलिए भारत को आतंकवाद से निपटने के लिए समन्वित कार्यवाही पर जोर देने तथा क्षेत्र में सुरक्षा एवं रक्षा से जुड़े विषयों पर व्यापक रूप से अपनी बात रखने में आसानी होगी।
  • शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने या आतंकवादियों के प्रशिक्षण से निपटने के लिए समन्वित प्रयास करने में सफल हो सकते हैं।
  • ऐसे में आतंकवाद, अलगाववाद और कट्टरता से संघर्ष को लेकर यह संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • इस संगठन के अधिकांश देशों में तेल और प्राकृतिक गैस के प्रचुर भंडार हैं। इससे भारत को मध्य-एशिया में प्रमुख गैस एवं तेल अन्वेषण परियोजनाओं तक व्यापक पहुंच मिल सकेगी।
  • यह संगठन पूरे क्षेत्र की समृद्धि के लिए जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, कृषि, ऊर्जा और विकास की समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित कर सकता है।

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